Hindi Shayari
शाम होते ही वो सूरज से हुकुमत छीन लेता है
सुबह होते ही वो तारो की कियाद्त छीन लिटा है
तरीके सिख उसकी जमीन पे चलने फिरने के
त्क्बुर करने वालो से वो इज्जत और डोलत छीन लेते है
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